Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics
Bhajan Lyrics

तेरे हाथों से बच जाएगी मेरे बेटे की जिंदगानी Lyrics | कितने दयालू थे बाबा भीम – बाबा साहब की पहली वकालत

Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: “तेरे हाथों से बच जाएगी मेरे बेटे की जिंदगानी” एक भावपूर्ण लोकगीत है, जिसे “कितने दयालू थे बाबा भीम – बाबा साहब की पहली वकालत” के नाम से भी जाना जाता है। यह गीत बाबा साहब डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की न्यायप्रियता, करुणा और गरीब एवं पीड़ित लोगों के प्रति संवेदनशीलता को लोककथा की शैली में प्रस्तुत करता है।

गीत में एक दुखी माँ अपने बेटे को बचाने के लिए न्याय की तलाश में जगह-जगह भटकती है। जब उसे कहीं से सहायता नहीं मिलती, तब वह बाबा साहब के पास अपनी फरियाद लेकर पहुँचती है। गीत में बाबा साहब को एक ऐसे न्यायप्रिय व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया है जो पीड़ित की बात सुनते हैं और उसे न्याय दिलाने के लिए आगे आते हैं।

Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: यदि आप Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics, कितने दयालू थे बाबा भीम Lyrics, बाबा साहब की पहली वकालत लोकगीत या इसका English/Roman Hindi Lyrics खोज रहे हैं, तो इस लेख में आपको गीत के बोल, भावार्थ, संदेश, बाबा साहब का संक्षिप्त परिचय और FAQs एक ही स्थान पर मिलेंगे।

महत्वपूर्ण नोट: यह गीत लोककथा/लोकगीत शैली में प्रचलित है। इसमें वर्णित घटनाओं और संवादों को प्रमाणित ऐतिहासिक दस्तावेज़ नहीं माना जाना चाहिए। गीत मुख्य रूप से बाबा साहब के न्याय, मानवता और सामाजिक समानता के प्रति सम्मान की लोकभावना को व्यक्त करता है।


Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: तेरे हाथों से बच जाएगी मेरे बेटे की जिंदगानी Lyrics in Hindi

मेरे बेटे की जिंदगानी।

मत ना रुदन मचावे,
रो-रो चली जा सेठानी।
तेरे हाथों से बच जाएगी,
मेरे बेटे की जिंदगानी॥

कुदरत भी थोड़ी ढल गई,
ना मेरा कोई भी साथी।
मेरे धोरे के लेना,
मेरी छोटी बतावे जाति।
सारी कचहरी घूम लाई,
मैं रो-रो हाल सुनाती।
पड़े मुसीबत साथ छोड़ दे,
यारे प्यारे साथी।
फिरूँ मैं धक्के खाती,
पड़ गई दर-दर ठोकर खानी।

मत ना रुदन मचावे,
रो-रो चली जा सेठानी॥


इकलौता है लाल मेरा,
ना और लाल है कोई।
या रचना तो विधाता की,
इसपे चले जोर ना कोई।
तुझे विधाता समझ लिया,
मैं तेरे आगे रोई।
घबरावे ना सेठानी तू,
जतन मिलेगा कोई।
जो बोई मैं काटूँगी,
मेरे चारों तरफ परेशानी।

मत ना रुदन मचावे,
रो-रो चली जा सेठानी॥


मेरी वकालत तू ही करेगा,
ये सारे हँस के बोले।
पहले ही कह देना था,
ये भेद बाद में खोले।
तेरे लाल को फाँसी होगी,
यूँ कह रहे बदबोले।
आज ते करनी छोड़ूँ वकालत,
जो पाप-पुण्य ना तोले।
पड़े हैं गम के झोले,
मनै छोड़ दिया अन्न-पानी।

मत ना रुदन मचावे,
रो-रो चली जा सेठानी॥


मेरी फाइल अब तो ले ले,
दुखिया तेर सुनावे।
तेरा केस मैं लड़ूँगा,
अब तो ना सेठानी घबरावे।
महान आत्मा है तू कोई,
मेरा कष्ट मिटावे।
कह दिए जा भीम,
तेरे ते जे ना बरी करावे।
चंद-मुकेश यो गावें,
बाबा भीम तेरी कहानी।

मत ना रुदन मचावे,
रो-रो चली जा सेठानी॥


Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics in English

Mere Bete Ki Jindgani.

Mat Na Rudhan Machave,
Ro-Ro Chali Ja Sethani.
Tere Hatho Se Bach Ja Gi,
Mere Bete Ki Jindgani॥

Kudrat Bhi Thodi Dhal Gi,
Na Mera Koi Bhi Sathi.
Mere Dhore Ke Lena,
Meri Chhoti Batave Jati.
Sari Kachari Ghoom Layi,
Main Ro-Ro Haal Sunati.
Pade Musibat Sath Chhod De,
Yare Pyare Sathi.
Phiru Main Dhakke Khati,
Pad Gi Dar-Dar Thokar Khani.

Mat Na Rudhan Machave,
Ro-Ro Chali Ja Sethani॥


Eklota Hai Laal Mera,
Na Aur Laal Hai Koi.
Ya Rachna To Vidhata Ki,
Ispe Chale Jor Na Koi.
Tujhe Vidhata Samajh Liya,
Main Tere Aage Roi.
Ghabrave Na Sethani Tu,
Jatan Milega Koi.
Jo Boyi Main Katungi,
Mere Charo Taraf Pareshani.

Mat Na Rudhan Machave,
Ro-Ro Chali Ja Sethani॥


Meri Vakalat Tu Hi Karega,
Ye Sare Hans Ke Bole.
Pehle Hi Keh Dena Tha,
Ye Bhed Baad Mein Khole.
Tere Laal Ko Fansi Hogi,
Yun Kah Re Badbole.
Aaj Te Karni Chhodu Vakalat,
Jo Paap-Punya Na Tole.
Pade Hai Gam Ke Jholle,
Manne Chhod Diya Ann-Pani.

Mat Na Rudhan Machave,
Ro-Ro Chali Ja Sethani॥


Meri File Ab To Le Le,
Dukhiya Teri Sunave.
Tera Case Main Ladunga,
Ab To Na Sethani Ghabrave.
Mahan Aatma Hai Tu Koi,
Mera Kasht Mitave.
Kah Diye Ja Bhim,
Tere Te Je Na Bari Karave.
Chand-Mukesh Yo Gave,
Baba Bhim Teri Kahani.

Mat Na Rudhan Machave,
Ro-Ro Chali Ja Sethani॥


Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: गीत का भावार्थ

यह लोकगीत एक असहाय माँ की पीड़ा और न्याय की तलाश को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत करता है। उसका इकलौता बेटा गंभीर संकट में है और वह अपने बेटे को बचाने के लिए हर संभव दरवाज़े पर दस्तक देती है।

गीत में माँ की बेबसी, गरीबी और सामाजिक परिस्थितियों का दर्द दिखाई देता है। वह कचहरी के चक्कर लगाती है, लोगों से सहायता माँगती है, लेकिन उसे कहीं से आशा नहीं मिलती। अंततः वह बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के पास पहुँचती है।

लोकगीत की कथा में बाबा साहब उसकी पीड़ा सुनकर उसका केस लड़ने के लिए तैयार होते हैं। इसी प्रसंग के माध्यम से गीत बाबा साहब को न्याय, मानवता, समानता और कमजोर वर्गों के सहारे के रूप में प्रस्तुत करता है।


Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: गीत में माँ की पीड़ा और भावनाएँ

इस लोकगीत की सबसे प्रभावशाली विशेषता माँ की भावनात्मक स्थिति है।

अपने इकलौते बेटे को संकट में देखकर उसकी चिंता, बेबसी और उम्मीद गीत के प्रत्येक पद में दिखाई देती है। वह सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद हार नहीं मानती और अपने बेटे के लिए न्याय की तलाश जारी रखती है।

यह प्रसंग हमें यह संदेश देता है कि किसी भी व्यक्ति की मजबूरी और पीड़ा को समझना तथा उसे न्याय दिलाने का प्रयास करना मानवता का महत्वपूर्ण कर्तव्य है।


Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: गीत में बाबा साहब की छवि

गीत में बाबा साहब की छवि एक ऐसे न्यायप्रिय और संवेदनशील विधिवेत्ता के रूप में सामने आती है जो पीड़ित व्यक्ति की आवाज सुनते हैं।

डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने सार्वजनिक जीवन में शिक्षा, कानून, समानता और सामाजिक न्याय को अत्यंत महत्व दिया। उन्होंने वंचित और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया।

इसी व्यापक सामाजिक छवि से प्रेरित होकर लोकगीतों में बाबा साहब को गरीब और पीड़ित लोगों के सहारे के रूप में चित्रित किया जाता है।


Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: डॉ. भीमराव अंबेडकर का संक्षिप्त परिचय

डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर भारत के महान समाज सुधारक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री और संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रमुख राष्ट्रनिर्माताओं में से एक थे।

उन्होंने अपना जीवन सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष, शिक्षा के प्रसार, समानता और नागरिक अधिकारों के लिए समर्पित किया।

उनका प्रसिद्ध संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” आज भी सामाजिक जागरूकता और शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणा देता है।


Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: इस लोकगीत से मिलने वाली प्रेरणा

इस गीत का संदेश केवल एक माँ और उसके बेटे की कहानी तक सीमित नहीं है। इससे कई महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश मिलते हैं—

  • न्याय हर व्यक्ति का अधिकार है।
  • कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए।
  • कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।
  • शिक्षा और कानून सामाजिक परिवर्तन के महत्वपूर्ण साधन हैं।
  • जाति और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध समानता का समर्थन करना चाहिए।
  • मानवता और करुणा समाज को बेहतर बनाने की आधारशिला हैं।
  • अन्याय के सामने आवाज उठाने का साहस रखना चाहिए।

Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: यह गीत किन अवसरों पर गाया जाता है?

यह लोकगीत बाबा साहब से जुड़े विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गाया या प्रस्तुत किया जा सकता है, जैसे—

  • डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती
  • सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • लोकगीत एवं लोकसंगीत आयोजन
  • सामाजिक समानता से जुड़े कार्यक्रम
  • विद्यालय एवं सामुदायिक कार्यक्रम
  • बाबा साहब की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम

Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: इस लोकगीत की विशेषताएँ

“तेरे हाथों से बच जाएगी मेरे बेटे की जिंदगानी” लोकभाषा और भावनात्मक कथानक के कारण श्रोताओं से सीधे जुड़ता है।

इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं—

  • ग्रामीण लोकभाषा का प्रयोग।
  • माँ की पीड़ा का भावपूर्ण चित्रण।
  • न्याय और मानवता का संदेश।
  • बाबा साहब के प्रति सम्मान।
  • सामाजिक समानता की भावना।
  • कथा और गीत का सुंदर संयोजन।
  • लोकसंगीत की सहज एवं प्रभावशाली शैली।

Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani – FAQs
1. “तेरे हाथों से बच जाएगी मेरे बेटे की जिंदगानी” गीत किस पर आधारित है?

यह बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की न्यायप्रिय और मानवीय छवि को केंद्र में रखकर प्रस्तुत किया जाने वाला लोकगीत है।

2. क्या “बाबा साहब की पहली वकालत” की यह घटना प्रमाणित इतिहास है?

इस गीत में प्रस्तुत कथा को प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह लोकपरंपरा और जनश्रुति की शैली में प्रचलित कथा है।

3. इस गीत में किसकी कहानी बताई गई है?

गीत में एक ऐसी माँ की कहानी प्रस्तुत की गई है जो अपने बेटे को बचाने और न्याय पाने के लिए संघर्ष करती है और अंततः बाबा साहब से सहायता की उम्मीद रखती है।

4. इस गीत का मुख्य संदेश क्या है?

गीत का मुख्य संदेश न्याय, मानवता, समानता, करुणा और जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता है।

5. डॉ. भीमराव अंबेडकर को महान विधिवेत्ता क्यों माना जाता है?

डॉ. अंबेडकर ने कानून और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे भारत के संविधान निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाने वाले व्यक्तित्वों में शामिल थे।

6. यह गीत किन अवसरों पर गाया जा सकता है?

इसे अंबेडकर जयंती, सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों और लोकसंगीत कार्यक्रमों में प्रस्तुत किया जा सकता है।

7. क्या इस पोस्ट में Hindi और English Lyrics उपलब्ध हैं?

हाँ, इस लेख में हिंदी Lyrics के साथ Roman Hindi/English Lyrics भी दिए गए हैं।

8. इस गीत से हमें क्या सीख मिलती है?

यह गीत हमें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने, जरूरतमंदों की सहायता करने और शिक्षा एवं समानता के महत्व को समझने की प्रेरणा देता है।


Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: – Keywords
  • तेरे हाथों से बच जाएगी मेरे बेटे की जिंदगानी Lyrics
  • कितने दयालू थे बाबा भीम Lyrics
  • बाबा साहब की पहली वकालत Lyrics
  • Tere Hatho Se Bach Ja Gi Lyrics
  • Tere Hatho Se Bach Jayegi Mere Bete Ki Jindgani
  • Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics
  • Baba Bhim Song Lyrics
  • Baba Saheb Ambedkar Song
  • Babasaheb Ambedkar Lokgeet
  • Dr BR Ambedkar Song Lyrics
  • Ambedkar Jayanti Song
  • बाबा भीम के गीत
  • बाबा साहब के लोकगीत
  • अंबेडकर लोकगीत Lyrics
  • Ambedkar Bhajan Lyrics
  • Hindi Lokgeet Lyrics
  • Baba Saheb Song
  • Ladla Mohit Official

Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: निष्कर्ष

“तेरे हाथों से बच जाएगी मेरे बेटे की जिंदगानी” एक भावनात्मक लोकगीत है, जिसमें एक माँ की पीड़ा, न्याय की तलाश और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति लोगों की श्रद्धा को लोकभाषा में प्रस्तुत किया गया है।

गीत का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है कि न्याय, समानता और मानवता किसी भी समाज की मजबूत नींव हैं। कठिन परिस्थितियों में किसी जरूरतमंद व्यक्ति का साथ देना और उसे न्याय दिलाने का प्रयास करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

लोकगीतों की अपनी एक अलग सांस्कृतिक भूमिका होती है। वे इतिहास के साथ-साथ लोगों की भावनाओं, स्मृतियों और किसी महान व्यक्तित्व के प्रति सम्मान को भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं। इसी दृष्टि से यह गीत बाबा साहब के न्याय और मानवता से जुड़े लोकभाव को सामने रखता है।

जय भीम। 💙
नमो बुद्धाय। 🙏

Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: You Can Follow Us For More Updates On Youtube Also. Please Share Our Blog To Your Friends And Family.

Tere Hatho Se Bach Ja Gi Mere Bete Ki Jindgani Lyrics: Related Bhajan

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *