Choti Diwali 2026 Date
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छोटी दिवाली 2026 कब है? जानें नरक चतुर्दशी की सही तारीख, अभ्यंग स्नान मुहूर्त, पूजा विधि, कथा और महत्व

छोटी दिवाली 2026 कब है? (Choti Diwali 2026 Date)

दीपावली का त्योहार भारत में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। दीपावली से पहले आने वाला नरक चतुर्दशी का पर्व छोटी दिवाली, रूप चौदस और नरक चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध किए जाने की पौराणिक मान्यता है। छोटी दिवाली पर दीपदान, अभ्यंग स्नान और भगवान की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

अगर आप जानना चाहते हैं कि छोटी दिवाली 2026 में कब है, नरक चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त क्या है, अभ्यंग स्नान कब करना चाहिए और इस दिन कौन-सी पूजा की जाती है, तो इस लेख में आपको पूरी जानकारी मिलेगी।

साल 2026 में नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। द्रिक पंचांग और एस्ट्रोसेज के अनुसार, नरक चतुर्दशी का मुख्य अनुष्ठान चतुर्दशी तिथि के दौरान सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान से जुड़ा है। इसी आधार पर 2026 में इसका मुख्य पर्व 8 नवंबर को निर्धारित है।

Choti Diwali 2026 Date

8 नवंबर, रविवार

छोटी दिवाली / नरक चौदस

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

अभ्यंग स्नान मुहूर्त

सुबह 5:36 से 6:38 बजे तक

नई दिल्ली के लिए एस्ट्रोसेज के अनुसार लगभग समय। स्थानीय पंचांग में अंतर संभव है।

जरूरी तारीख संबंधी जानकारी

कुछ कैलेंडर में 7 नवंबर को चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ दिखने के कारण भ्रम हो सकता है। 2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह लगभग 10:47 बजे शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह लगभग 11:27 बजे तक रहेगी। नरक चतुर्दशी के मुख्य अभ्यंग स्नान के लिए 8 नवंबर की सुबह का मुहूर्त दिया गया है। इसलिए लेख में छोटी दिवाली की मुख्य पर्व तिथि 8 नवंबर लिखना उचित है।

नरक चतुर्दशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

विवरणतारीख और समय
नरक चतुर्दशी8 नवंबर 2026, रविवार
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ7 नवंबर, सुबह लगभग 10:47 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त8 नवंबर, सुबह लगभग 11:27 बजे
अभ्यंग स्नान मुहूर्तसुबह 5:36 से 6:38 बजे
मुख्य आराध्यभगवान श्रीकृष्ण
अन्य नामछोटी दिवाली, नरक चौदस, रूप चौदस

नोट: मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रकाशित पंचांग गणनाओं पर आधारित है। अपने शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करें।

छोटी दिवाली का धार्मिक महत्व (Narak Chaturdashi Significance)

नरक चतुर्दशी का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक अत्याचारी असुर का वध किया था और उसके बंदीगृह से अनेक लोगों को मुक्त कराया था।

नरकासुर के अत्याचारों से मुक्ति मिलने की खुशी में लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया। इसी धार्मिक मान्यता के आधार पर नरक चतुर्दशी पर दीपदान और उत्सव की परंपरा प्रचलित हुई।

द्रिक पंचांग के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण और देवी सत्यभामा की कथा का विशेष संबंध है। इस दिन सूर्योदय से पहले तेल स्नान यानी अभ्यंग स्नान का भी विशेष महत्व बताया गया है।

Narak Chaturdashi Significance

छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी क्यों कहते हैं?

नरक चतुर्दशी का नाम नरकासुर से जुड़ी पौराणिक कथा के कारण प्रचलित हुआ। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी।

इसी कारण इस दिन को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। इसे छोटी दिवाली इसलिए कहते हैं, क्योंकि उत्तर भारत में यह दीपावली के मुख्य लक्ष्मी पूजन से पहले मनाए जाने वाले दीपोत्सव का महत्वपूर्ण दिन है।

अभ्यंग स्नान 2026 कब है? (Abhyang Snan 2026)

नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान की विशेष परंपरा है। अभ्यंग स्नान का अर्थ है स्नान से पहले शरीर पर तेल लगाना और फिर स्नान करना। इसे विशेष रूप से सूर्योदय से पहले करने की परंपरा बताई गई है।

साल 2026 में नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर, रविवार की सुबह किया जाएगा। नई दिल्ली के लिए एस्ट्रोसेज ने इसका मुहूर्त सुबह 5:36 बजे से 6:37:53 बजे तक दिया है।

Abhyang Snan 2026

अभ्यंग स्नान की सामान्य विधि

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान की तैयारी करें।
  2. परंपरा के अनुसार शरीर पर तिल का तेल लगाएं।
  3. स्नान के लिए स्वच्छ जल का उपयोग करें।
  4. स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें।
  5. भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करके परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान करने से पापों से मुक्ति और आध्यात्मिक शुद्धि की कामना की जाती है।

छोटी दिवाली 2026 पूजा विधि (Choti Diwali Puja Vidhi)

छोटी दिवाली पर पूजा और दीपदान अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। सामान्य पूजा विधि इस प्रकार है:

1. घर की साफ-सफाई करें

छोटी दिवाली से पहले घर और पूजा स्थल को साफ करें। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और दीपक जलाने की तैयारी करें।

2. सुबह अभ्यंग स्नान करें

स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय में अभ्यंग स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें।

3. भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें

भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। उन्हें पुष्प, चंदन, अक्षत और फल अर्पित करें। नरकासुर वध की कथा का स्मरण करें।

4. दीपदान करें

शाम के समय घर के मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। दीपदान को अंधकार पर प्रकाश और अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।

5. आरती और प्रसाद वितरण करें

भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद वितरित करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार भजन-कीर्तन भी कर सकते हैं।

नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा (Narak Chaturdashi Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था। उसने अपने बल और अहंकार के कारण देवताओं तथा अनेक लोगों को परेशान कर रखा था। उसके अत्याचारों से सभी त्रस्त थे।

नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। भगवान श्रीकृष्ण ने देवी सत्यभामा के साथ नरकासुर के विरुद्ध युद्ध किया।

Narak Chaturdashi Vrat Katha

कथा के अनुसार, युद्ध में नरकासुर का वध हुआ और उसके बंदीगृह में कैद लोगों को मुक्त कराया गया। इस विजय से लोगों को अत्याचारों से मुक्ति मिली और चारों ओर प्रसन्नता छा गई।

मान्यता है कि नरकासुर पर विजय के उपलक्ष्य में लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया। इसी घटना की स्मृति में नरक चतुर्दशी पर दीपदान और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है।

कथा का संदेश: अहंकार और अत्याचार का अंत निश्चित है। धर्म, सत्य और अच्छाई अंततः विजय प्राप्त करते हैं।

छोटी दिवाली और रूप चौदस में क्या अंतर है?

छोटी दिवाली और रूप चौदस आमतौर पर नरक चतुर्दशी के ही अलग-अलग नाम हैं। उत्तर भारत में इसे छोटी दिवाली या नरक चौदस कहा जाता है, जबकि कई क्षेत्रों में रूप चौदस या रूप चतुर्दशी नाम प्रचलित है।

नामप्रचलित महत्व
छोटी दिवालीदीपावली से पहले दीप जलाने का पर्व
नरक चतुर्दशीनरकासुर वध से जुड़ा पर्व
नरक चौदसनरक चतुर्दशी का प्रचलित नाम
रूप चौदसअभ्यंग स्नान और सौंदर्य-सज्जा से जुड़ी क्षेत्रीय परंपरा

द्रिक पंचांग नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी उल्लेखित करता है।

छोटी दिवाली 2026 पर क्या करें?

छोटी दिवाली पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निम्नलिखित कार्य किए जा सकते हैं:

  • सुबह अभ्यंग स्नान करें।
  • भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण और पूजन करें।
  • शाम को घर में दीपक जलाएं।
  • जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
  • घर और आसपास स्वच्छता बनाए रखें।
  • परिवार के साथ प्रसन्नता से त्योहार मनाएं।

दीपावली 2026 का पूरा कैलेंडर

छोटी दिवाली दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। साल 2026 में प्रमुख त्योहारों की तारीखें इस प्रकार हैं:

त्योहारतारीख
धनतेरस6 नवंबर 2026, शुक्रवार
नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली8 नवंबर 2026, रविवार
दीपावली / लक्ष्मी पूजा8 नवंबर 2026, रविवार
गोवर्धन पूजा10 नवंबर 2026, मंगलवार
भाई दूज11 नवंबर 2026, बुधवार

ध्यान दें कि 2026 में नरक चतुर्दशी और दीपावली दोनों 8 नवंबर को पड़ रही हैं। इसलिए अभ्यंग स्नान सुबह और लक्ष्मी पूजन शाम को अलग-अलग समय पर किया जा सकता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त अवश्य देखें।

छोटी दिवाली 2026 – FAQs

छोटी दिवाली 2026 में कब है?

छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी।

नरक चतुर्दशी 2026 का अभ्यंग स्नान मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली के लिए अभ्यंग स्नान मुहूर्त लगभग सुबह 5:36 बजे से 6:38 बजे तक है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

क्या छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी एक ही हैं?

हां, छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी या नरक चौदस भी कहा जाता है।

नरक चतुर्दशी पर किस भगवान की पूजा होती है?

नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और नरकासुर वध की कथा का स्मरण किया जाता है।

नरक चतुर्दशी 2026 में 7 नवंबर को है या 8 नवंबर को?

चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह तक रहेगी। मुख्य नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान 8 नवंबर को सूर्योदय से पहले निर्धारित है।

छोटी दिवाली पर दीपक क्यों जलाए जाते हैं?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय और अत्याचार से मुक्ति की खुशी में दीप जलाने की परंपरा जुड़ी है।

निष्कर्ष

छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी 2026 में 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन अभ्यंग स्नान, भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और दीपदान का विशेष धार्मिक महत्व है। नरकासुर पर भगवान श्रीकृष्ण की विजय की स्मृति में मनाया जाने वाला यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है।

इस छोटी दिवाली पर अपने घर में दीपक जलाएं, भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें और परिवार के साथ प्रेम, सद्भाव एवं खुशियों के साथ त्योहार मनाएं।

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