Aayo Sanwariyo Sarkar Leele Pe Chad Ke lyrics
Bhajan Lyrics

आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के – खाटू श्याम भजन लिरिक्स | Aayo Sanwariyo Sarkar Leele Pe Chad Ke

Aayo Sanwariyo Sarkar Leele Pe Chad Ke lyrics: “आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के” एक जोशीला और भक्तिमय खाटू श्याम जी का भजन है। इस भजन में बाबा श्याम के दिव्य स्वरूप, उनकी शाही सवारी, घोड़े की टाप, केसरिया बागा, रंग-बिरंगी पगड़ी, मोर पंख और हाथ में लहराते निशान का मनमोहक वर्णन किया गया है।

भजन में बाबा श्याम को लीले घोड़े पर सवार होकर भक्तों के बीच आते हुए कल्पना किया गया है। बाबा की सवारी का ऐसा जीवंत चित्रण किया गया है कि भक्त के मन में उत्साह और भक्ति की लहर दौड़ने लगती है।

इस भजन की खासियत इसकी राजस्थानी/मारवाड़ी लोकभाषा, उत्साहपूर्ण शब्दों और बाबा की शाही सवारी के वर्णन में है। इसे श्याम संकीर्तन, भजन संध्या, जागरण और बाबा की सवारी के अवसर पर विशेष आनंद के साथ गाया जा सकता है।

🙏 आयो साँवरियो सरकार – भजन परिचय

खाटू श्याम जी की भक्ति में बाबा की सवारी का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त जब अपने सांवरिया सरकार को घोड़े पर सवार होकर आते हुए मन में देखता है, तो उसके अंदर श्रद्धा के साथ-साथ उत्साह भी भर जाता है।

इस भजन में बाबा श्याम के उसी भव्य और मनमोहक रूप का वर्णन किया गया है।

“आयो साँवरियो सरकार, लीले पे चढ़ के” — यह पंक्ति अपने आप में बाबा की सवारी का सुंदर दृश्य सामने रख देती है।

भक्त के मन में ऐसा भाव है जैसे सांवरिया सरकार स्वयं अपने लीले घोड़े पर सवार होकर दर्शन देने आ गए हों और उनकी सवारी को देखकर भक्त का रोम-रोम खुशी से झूम उठा हो।


Aayo Sanwariyo Sarkar Leele Pe Chad Ke lyrics: आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के – संपूर्ण Lyrics

आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के,
लीले पे चढ़ के यो घोड़े पे चढ़ के,
आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के,

मुछा की मरोड़ कैसे रॉब है निराला,
धुनगर वाला बाल मेरो सांवरो रखलो तो,
तो लीले की टाप टप टप खड़के,
आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के…

केसरिया है भागो जापे फेटो पचरंगो,
मोर पंख जय पूरी रुमाल है सुरांगो,
तो मुल्क निहारु तने जीब भर के,
आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के।

बांकी सी लटक पर बाबलो दीवानो,
मन में मगन मेरो जीब मस्तानो तो,
नहीं कोई दुसरो तो तेरे से भड़के,
आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के।

वीर हनुमान के निशान इक हाथ में,
पवन कुमार सोहे सँवारे के साथ में तो,
तो देख के सवारी अंग अंग फड़के,
आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के।


Aayo Sanwariyo Sarkar Leele Pe Chad Ke lyrics

Aayo Sanwariyo Sarkar Leele Pe Chad Ke lyrics: भजन का मुख्य भाव

इस भजन का मुख्य भाव बाबा श्याम की भव्य सवारी के दर्शन से पैदा होने वाला उत्साह और आनंद है।

भक्त बाबा के स्वरूप का वर्णन करते हुए उनकी मूंछों की शान, सिर पर सजी पगड़ी, मोर पंख और हाथ में निशान को याद करता है। बाबा के घोड़े की टापों की कल्पना मात्र से भक्त का मन रोमांचित हो उठता है।

यह भजन बाबा की आराधना को गंभीर या शांत रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उत्सव, उमंग और जयकारों के रंग में प्रस्तुत करता है।


Aayo Sanwariyo Sarkar Leele Pe Chad Ke lyrics: भजन का भावार्थ और अर्थ

“आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के”

भक्त खुशी से कहता है कि मेरे सांवरिया सरकार अपने लीले घोड़े पर सवार होकर आ गए हैं।

यह बाबा श्याम के आगमन की खुशी को व्यक्त करने वाली पंक्ति है।

“लीले पे चढ़ के यो घोड़े पे चढ़ के”

यहां बाबा की घुड़सवारी का सुंदर वर्णन है। भक्त के मन में बाबा का वीर और राजसी स्वरूप दिखाई देता है।

“मुछा की मरोड़, कैसे रॉब है निराला”

भक्त बाबा के राजसी और प्रभावशाली रूप की प्रशंसा करता है। उनकी मूंछों की शान और चेहरे का तेज उनके व्यक्तित्व को और आकर्षक बनाता है।

यह पंक्ति बाबा के वीर और शाही स्वरूप को दर्शाती है।

“लीले की टाप टप टप खड़के”

घोड़े के दौड़ने से निकलने वाली टप-टप की आवाज को शब्दों में पिरोया गया है।

भक्त कल्पना करता है कि जैसे ही बाबा की सवारी आती है, लीले के कदमों की आवाज वातावरण में गूंजने लगती है और हर भक्त का मन खुशी से भर जाता है।


Aayo Sanwariyo Sarkar Leele Pe Chad Ke lyrics: “केसरिया है भागो” का भाव

केसरिया बागा बाबा के दिव्य और राजसी स्वरूप की ओर संकेत करता है। भक्त बाबा को केसरिया वस्त्रों में सजा हुआ देखता है।

इसके साथ पचरंगी फेटा और मोर पंख बाबा की सुंदरता को और बढ़ाते हैं।

भक्त बाबा के इस मनमोहक स्वरूप को देखकर कहता है कि वह उन्हें जी भरकर निहारना चाहता है।

“मोर पंख जय पूरी रुमाल है सुरांगो”

इस पंक्ति में बाबा के श्रृंगार और उनकी शोभा का वर्णन किया गया है। मोर पंख और रंग-बिरंगे श्रृंगार से बाबा का स्वरूप अत्यंत आकर्षक दिखाई देता है।

“तो मुल्क निहारु तने जीब भर के”

भक्त का भाव है कि मैं आपको जी भरकर निहारता रहूं और आपके इस सुंदर स्वरूप का दर्शन करता रहूं।

यह भगवान के दर्शन की लालसा को व्यक्त करता है।


Aayo Sanwariyo Sarkar Leele Pe Chad Ke lyrics: “बांकी सी लटक पर बाबलो दीवानो” का अर्थ

इस अंतरे में भक्त अपने मन की अवस्था बताता है।

बाबा की चाल, उनका अंदाज और उनका रूप इतना मनमोहक है कि भक्त पूरी तरह उनके प्रेम में दीवाना हो गया है।

“मन में मगन मेरो जीब मस्तानो”

बाबा की भक्ति में भक्त का मन आनंद और मस्ती से भर गया है।

यहां भक्ति और प्रेम के आनंद को दर्शाया गया है।

“नहीं कोई दुसरो तो तेरे से भड़के”

भक्त बाबा से अपने विशेष प्रेम और लगाव को व्यक्त करता है। उसके लिए बाबा जैसा कोई दूसरा नहीं है।

उसका मन केवल सांवरिया श्याम में ही रम गया है।


Aayo Sanwariyo Sarkar Leele Pe Chad Ke lyrics: वीर हनुमान के निशान का महत्व

भजन के अंतिम अंतरे में वीर हनुमान के निशान का उल्लेख किया गया है।

“वीर हनुमान के निशान इक हाथ में”

यह बाबा की सवारी को और भी भव्य एवं धार्मिक स्वरूप प्रदान करता है।

खाटू श्याम भक्ति में निशान यात्रा का विशेष भाव है। भक्त श्रद्धा से निशान लेकर बाबा के दरबार की ओर बढ़ते हैं।

“पवन कुमार सोहे साँवरे के साथ में”

यहां पवन पुत्र हनुमान अर्थात भगवान हनुमान की उपस्थिति का भाव है। बाबा श्याम की सवारी के साथ हनुमान जी के निशान का दृश्य भक्त के मन में वीरता और भक्ति दोनों का भाव पैदा करता है।

“देख के सवारी अंग-अंग फड़के”

बाबा की भव्य सवारी देखकर भक्त का रोम-रोम उत्साह से भर जाता है।

यह पंक्ति भजन के पूरे उत्साह और उमंग को अपने चरम पर पहुंचाती है।


Aayo Sanwariyo Sarkar Leele Pe Chad Ke lyrics: बाबा श्याम की सवारी का भक्तिमय दृश्य

इस भजन को सुनते समय बाबा श्याम की एक भव्य सवारी की कल्पना की जा सकती है—

सांवरिया श्याम लीले घोड़े पर सवार हैं, सिर पर रंग-बिरंगा फेटा सजा है, मोर पंख शोभा बढ़ा रहा है और हाथ में निशान लहरा रहा है।

चारों ओर भक्तों की भीड़ है।

जय श्री श्याम के जयकारे गूंज रहे हैं।

लीले के कदमों की टाप वातावरण में सुनाई दे रही है।

और बाबा की एक झलक पाने के लिए भक्तों की आंखें उनके दर्शन को आतुर हैं।

यही दृश्य इस भजन को सवारी और संकीर्तन के लिए बेहद जोशीला बनाता है।


Aayo Sanwariyo Sarkar Leele Pe Chad Ke lyrics: इस भजन की खासियत

“आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के” की कुछ प्रमुख विशेषताएं:

  • 🌺 बाबा श्याम की शाही सवारी का वर्णन
  • 🐎 लीले घोड़े का सुंदर चित्रण
  • 🧡 केसरिया वस्त्र और रंग-बिरंगे फेटे का वर्णन
  • 🦚 मोर पंख का उल्लेख
  • 🚩 हनुमान जी के निशान का भाव
  • 🙏 बाबा के प्रति भक्त का प्रेम
  • 🎵 जोशीली और उत्सवपूर्ण भक्ति
  • ❤️ राजस्थानी/मारवाड़ी लोकभाषा का सुंदर प्रयोग

🙏 कब गाएं “आयो साँवरियो सरकार” भजन?

यह भजन विशेष रूप से ऐसे अवसरों पर गाया जा सकता है जहां भक्ति के साथ उत्सव और उमंग का वातावरण हो:

  • 🛕 खाटू श्याम संकीर्तन
  • 🚩 निशान यात्रा
  • 🎵 भजन संध्या
  • 🌺 श्याम जागरण
  • 🐎 बाबा की सवारी के अवसर पर
  • 🙏 श्याम जन्मोत्सव
  • 🎉 धार्मिक कार्यक्रम
  • ❤️ व्यक्तिगत श्याम भक्ति

इसकी तेज और उत्साहपूर्ण शैली भक्तों को झूमने और जयकारे लगाने के लिए प्रेरित करती है।


🌼 भजन से मिलने वाला भक्ति संदेश

इस भजन का संदेश है कि भगवान के दर्शन और उनकी भक्ति में मन को आनंद से भर देना चाहिए।

जब भक्त बाबा के सुंदर स्वरूप का ध्यान करता है, तो उसके भीतर प्रेम, उत्साह और सकारात्मक भाव पैदा होते हैं।

बाबा की सवारी का यह वर्णन केवल बाहरी सुंदरता का वर्णन नहीं है, बल्कि यह भक्त के भीतर मौजूद श्रद्धा और प्रेम की अभिव्यक्ति भी है।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल – FAQ

1. “आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के” भजन किस भगवान को समर्पित है?

यह भजन खाटू श्याम जी को समर्पित है। इसमें बाबा श्याम के लीले घोड़े पर सवार होकर आने का सुंदर वर्णन किया गया है।

2. भजन में “लीले” किसे कहा गया है?

भजन में लीले बाबा श्याम के घोड़े के लिए प्रयोग किया गया नाम है। बाबा की घुड़सवारी इस भजन का प्रमुख आकर्षण है।

3. इस भजन में बाबा श्याम के किस स्वरूप का वर्णन है?

भजन में बाबा के राजसी और वीर स्वरूप का वर्णन है। इसमें उनकी मूंछों की शान, केसरिया वस्त्र, रंग-बिरंगा फेटा, मोर पंख और निशान का उल्लेख मिलता है।

4. “लीले की टाप टप टप खड़के” का क्या अर्थ है?

इसका भाव है कि बाबा के घोड़े के दौड़ने की टापों की आवाज वातावरण में गूंज रही है और उनकी सवारी के आगमन से भक्तों में उत्साह भर रहा है।

5. भजन में हनुमान जी के निशान का उल्लेख क्यों किया गया है?

भजन में वीर हनुमान के निशान का उल्लेख बाबा की सवारी और भक्तिमय वातावरण को और अधिक भव्य बनाने के लिए किया गया है।

6. यह भजन किस अवसर पर गाया जा सकता है?

इसे श्याम संकीर्तन, निशान यात्रा, जागरण, भजन संध्या, धार्मिक समारोह और बाबा श्याम की सवारी से जुड़े कार्यक्रमों में गाया जा सकता है।

7. इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

इस भजन का मुख्य भाव बाबा श्याम के दर्शन की खुशी, उनकी सवारी का उत्साह और उनके प्रति भक्त का प्रेम है।


🌺 निष्कर्ष

“आयो साँवरियो सरकार लीले पे चढ़ के” बाबा श्याम की भव्य सवारी और उनके राजसी स्वरूप का उत्साहपूर्ण वर्णन करने वाला भक्तिमय भजन है।

लीले घोड़े की टाप, बाबा का शाही अंदाज, केसरिया बागा, पचरंगी फेटा, मोर पंख और हाथ में लहराता निशान—इन सभी दृश्यों के माध्यम से भजन बाबा श्याम की एक सुंदर छवि भक्त के मन में उतार देता है।

बाबा की सवारी की कल्पना मात्र से भक्त का मन आनंद और भक्ति से भर जाता है और उसके मुख से अपने आप निकल पड़ता है—

आयो साँवरियो सरकार,
लीले पे चढ़ के…

🙏 जय श्री श्याम।
🚩 हारे के सहारे बाबा श्याम की जय।
🐎 लीले वाले श्याम की जय।

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