Samvidhan Ke Rachayita Bheem Ji Lyrics: “संविधान के-रचयिता भीम जी, इस संसार में अमर हुए” एक भावपूर्ण अंबेडकर भजन है, जिसमें बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संघर्ष, शिक्षा, त्याग और समाज के लिए किए गए महान कार्यों को श्रद्धा के साथ याद किया गया है।
इस भजन में उस दौर का वर्णन किया गया है जब समाज में छुआछूत और असमानता जैसी सामाजिक बुराइयां मौजूद थीं। गीत बाबा साहेब के संघर्ष को याद करते हुए शिक्षा, अधिकार, समानता और सामाजिक सम्मान का संदेश देता है।
भजन की पंक्तियां बाबा साहेब के जीवन-संघर्ष के साथ-साथ यह प्रेरणा भी देती हैं कि समाज को शिक्षित, संगठित और जागरूक बनकर आगे बढ़ना चाहिए।
संविधान के रचयिता भीम जी – हिंदी Lyrics
संविधान के रचयिता-भीम जी
इस संसार में अमर हुए
संविधान के रचयिता भीम जी
इस संसार में अमर हुए
चारों तरफ थी अछूत असमता,
चारों तरफ थी अछूत असमता,
हर अधिकार दिला वो गये।
संविधान के रचयिता-भीम जी
इस संसार में अमर हुए
संविधान के रचयिता भीम जी
इस संसार में अमर हुए।
अंतरा 1
जब से जन्म लिया बाबा साहेब ने,
कष्ट ही कष्ट उठाए।
दुःख सहकर भी बने वो शिक्षित,
पढ़ के विदेश में आए।
जब से जन्म लिया बाबा साहेब ने,
कष्ट ही कष्ट उठाए।
दुःख सहकर भी बने वो शिक्षित,
पढ़ के विदेश में आए।
जीवन का दीपक सबका जलाके,
बाती की तरह खुद जल वो गये।
संविधान के रचयिता भीम जी
इस संसार में अमर हुए
संविधान के रचयिता भीम जी
इस संसार में अमर हुए।
अंतरा 2
देश की खातिर बाबा साहेब ने,
जो बलिदान दिया है।
खून से अपने सींचा समाज को,
बेटा कुर्बान किया है।
देश की खातिर बाबा साहेब ने,
जो बलिदान दिया है।
खून से अपने सींचा समाज को,
बेटा कुर्बान किया है।
एक हमारे हंसने की खातिर,
अपना वो सब कुर्बान गए।
संविधान के रचयिता-भीम जी
इस संसार में अमर हुए
संविधान के रचयिता-भीम जी
इस संसार में अमर हुए।
अंतरा 3
मोहित की इतनी औकात नहीं है जो,
उनके विषय में लिख पाऊं।
दिल यही चाहे हर दम उनके,
चरणों में शीश झुकाऊं।
मोहित की इतनी औकात नहीं है जो,
उनके विषय में लिख पाऊं।
दिल यही चाहे हर दम उनके,
चरणों में शीश झुकाऊं।
बनके सुशिक्षित और संगठित,
रोशन भीम का नाम करे।
संविधान के रचयिता-भीम जी
इस संसार में अमर हुए
संविधान के रचयिता-भीम जी
इस संसार में अमर हुए।
इस संसार में अमर हुए,
इस संसार में अमर हुए।
Samvidhan Ke Rachayita Bheem Ji – English Lyrics
Samvidhan Ke Rachayita-Bheem Ji
Is Sansar Mein Amar Hue
Samvidhan Ke Rachayita-Bheem Ji
Is Sansar Mein Amar Hue
Charon Taraf Thi Achhoot Asamta,
Charon Taraf Thi Achhoot Asamta,
Har Adhikar Dila Woh Gaye.
Samvidhan Ke Rachayita-Bheem Ji
Is Sansar Mein Amar Hue
Samvidhan Ke Rachayita-Bheem Ji
Is Sansar Mein Amar Hue.
Antara 1
Jab Se Janm Liya Baba Saheb Ne,
Kasht Hi Kasht Uthaye.
Dukh Sahkar Bane Woh Shikshit,
Padh Ke Videsh Mein Aaye.
Jab Se Janm Liya Baba Saheb Ne,
Kasht Hi Kasht Uthaye.
Dukh Sahkar Bane Woh Shikshit,
Padh Ke Videsh Mein Aaye.
Jeevan Ka Deepak Sabka Jalake,
Baati Ki Tarah Khud Jal Woh Gaye.
Samvidhan Ke Rachayita-Bheem Ji
Is Sansar Mein Amar Hue
Samvidhan Ke Rachayita-Bheem Ji
Is Sansar Mein Amar Hue.
Antara 2
Desh Ki Khatir Baba Saheb Ne,
Jo Balidan Diya Hai.
Khoon Se Apne Sincha Samaj Ko,
Beta Kurbaan Kiya Hai.
Desh Ki Khatir Baba Saheb Ne,
Jo Balidan Diya Hai.
Khoon Se Apne Sincha Samaj Ko,
Beta Kurbaan Kiya Hai.
Ek Hamare Hansne Ki Khatir,
Apna Woh Sab Kurbaan Gaye.
Samvidhan Ke Rachayita Bheem Ji
Is Sansar Mein Amar Hue
Samvidhan Ke Rachayita Bheem Ji
Is Sansar Mein Amar Hue.
Antara 3
Mohit Ki Itni Aukaat Nahi Hai Jo,
Unke Vishay Mein Likh Paun.
Dil Yahi Chahe Har Dam Unke,
Charanon Mein Sheesh Jhukaun.
Mohit Ki Itni Aukaat Nahi Hai Jo,
Unke Vishay Mein Likh Paun.
Dil Yahi Chahe Har Dam Unke,
Charanon Mein Sheesh Jhukaun.
Banke Shikshit Aur Sangathit,
Roshan Bheem Ka Naam Kare.
Samvidhan Ke Rachayita-Bheem Ji
Is Sansar Mein Amar Hue
Samvidhan Ke Rachayita-Bheem Ji
Is Sansar Mein Amar Hue.
Is Sansar Mein Amar Hue,
Is Sansar Mein Amar Hue.
भजन का भावार्थ और संदेश
“संविधान के रचयिता भीम-जी” भजन बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन और उनके संघर्ष को श्रद्धापूर्वक याद करता है।
भजन की शुरुआत सामाजिक असमानता और छुआछूत की स्थिति को सामने रखती है। इसके बाद बाबा साहेब के कठिन जीवन, शिक्षा के प्रति उनके समर्पण और समाज के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष का भाव दिखाई देता है।
इस भजन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश शिक्षा और सामाजिक जागरूकता है। बाबा साहेब का जीवन इस बात की प्रेरणा देता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा को अपना हथियार बनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
अंतिम अंतरे में लेखक बाबा साहेब के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए “शिक्षित और संगठित” होकर उनके नाम को रोशन करने की प्रेरणा देता है।
भजन की प्रमुख विशेषताएं
इस भजन में मुख्य रूप से निम्न भाव देखने को मिलते हैं:
- बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति श्रद्धा
- शिक्षा के महत्व का संदेश
- सामाजिक समानता की भावना
- अधिकारों और सम्मान की बात
- संघर्ष और त्याग की प्रेरणा
- छुआछूत एवं असमानता के विरुद्ध चेतना
- समाज को शिक्षित और संगठित होने का संदेश
- संविधान और सामाजिक न्याय के प्रति सम्मान
“संविधान के रचयिता भीम जी” भजन का मुख्य संदेश
भजन का मूल संदेश यह है कि शिक्षा, समानता, अधिकार और सामाजिक जागरूकता समाज को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण साधन हैं।
बाबा साहेब के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज को शिक्षा के महत्व को समझना चाहिए और एक बेहतर एवं समान समाज के निर्माण के लिए मिलकर प्रयास करना चाहिए।
यह भजन किन अवसरों पर प्रस्तुत किया जा सकता है?
यह भजन बाबा साहेब से जुड़े विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुत किया जा सकता है, जैसे:
- अंबेडकर जयंती
- सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम
- सांस्कृतिक कार्यक्रम
- भीम जयंती समारोह
- संविधान दिवस से जुड़े कार्यक्रम
- सामाजिक समानता से जुड़े आयोजन
- भजन एवं गीत कार्यक्रम
Frequently Asked Questions (FAQ)
1. “संविधान के रचयिता भीम जी” भजन किसके बारे में है?
यह भजन बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संघर्ष, शिक्षा, त्याग और समाज के लिए उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक प्रस्तुत करता है।
2. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
इस भजन का मुख्य संदेश शिक्षा, समानता, अधिकार, सामाजिक सम्मान और जागरूकता से जुड़ा है।
3. Samvidhan Ke Rachayita Bheem Ji Lyrics कहाँ पढ़ सकते हैं?
इस पोस्ट में संविधान के रचयिता भीम जी के हिंदी lyrics और English transliteration दोनों दिए गए हैं।
4. यह भजन किन कार्यक्रमों में गाया जा सकता है?
इसे अंबेडकर जयंती, भीम जयंती, सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों में प्रस्तुत किया जा सकता है।
5. भजन में “शिक्षित और संगठित” होने की बात क्यों कही गई है?
यह पंक्ति शिक्षा और सामाजिक एकजुटता के महत्व को दर्शाती है तथा लोगों को जागरूक होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
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निष्कर्ष
“संविधान के रचयिता भीम जी” एक श्रद्धापूर्ण भजन है जो बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संघर्ष, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन के संदेश को भावनात्मक शब्दों में प्रस्तुत करता है।
भजन की पंक्तियां हमें यह याद दिलाती हैं कि शिक्षा और जागरूकता समाज को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बाबा साहेब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि उनके विचारों को समझने और शिक्षा, समानता तथा सामाजिक सम्मान के मूल्यों को आगे बढ़ाने में है।
Ladla Mohit Official पर ऐसे ही भजन, Lyrics और सामाजिक जागरूकता से जुड़े लेख पढ़ते रहें।
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