2 Oct Gandhi Jayanti 2026
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2 Oct Gandhi Jayanti 2026: महात्मा गांधी का जीवन, संघर्ष, देश के लिए योगदान, उपलब्धियां और पूरी जानकारी

2 Oct Gandhi Jayanti 2026: हर साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाई जाती है। यह दिन भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और अहिंसा के पुजारी महात्मा-गांधी की जयंती के रूप में मनाया जाता है। महात्मा-गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह और स्वराज के उनके विचारों ने न केवल भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी, बल्कि पूरी दुनिया में शांतिपूर्ण संघर्ष का एक प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किया।

गांधी जयंती भारत के प्रमुख राष्ट्रीय दिवसों में से एक है। इस दिन देशभर में प्रार्थना सभाएं, श्रद्धांजलि कार्यक्रम, स्वच्छता अभियान और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस (International Day of Non-Violence) के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।


2 Oct Gandhi Jayanti 2026: गांधी जयंती2026 कब है?

गांधी जयंती 2026 में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

यह महात्मा-गांधी की 157वीं जयंती होगी, क्योंकि उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था।

दिन: शुक्रवार
तारीख: 2 अक्टूबर 2026
अवसर: महात्मा गांधी जयंती
पूरा नाम: मोहनदास करमचंद गांधी
जन्म स्थान: पोरबंदर, गुजरात
जन्म तिथि: 2 अक्टूबर 1869
निधन: 30 जनवरी 1948
प्रमुख विचार: सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह और स्वराज


महात्मा गांधी का जन्म कब और कहां हुआ था?

महात्मा-गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को तत्कालीन काठियावाड़ क्षेत्र के पोरबंदर में हुआ था, जो वर्तमान में गुजरात राज्य में है। उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जिसमें प्रशासनिक और धार्मिक दोनों प्रकार के संस्कारों का प्रभाव था। भारत सरकार के स्रोतों के अनुसार उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर और बाद में राजकोट में दीवान रहे, जबकि उनकी माता पुतलीबाई धार्मिक प्रवृत्ति की थीं।

उनका जन्मस्थान आज कीर्ति मंदिर के नाम से जाना जाता है और पोरबंदर गांधीजी की जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है।


महात्मा गांधी के माता-पिता कौन थे?

महात्मा-गांधी के पिता का नाम करमचंद गांधी था, जिन्हें काबा गांधी के नाम से भी जाना जाता था। वे पोरबंदर और राजकोट में दीवान के पद पर रहे।

उनकी माता का नाम पुतलीबाई गांधी था। पुतलीबाई धार्मिक और आध्यात्मिक विचारों वाली महिला थीं। उनके जीवन में उपवास, प्रार्थना और धार्मिक अनुशासन का महत्वपूर्ण स्थान था। गांधीजी के व्यक्तित्व और विचारों पर उनकी माता के संस्कारों का गहरा प्रभाव पड़ा।

गांधीजी ने सत्य, संयम, आत्म-अनुशासन और सेवा जैसे मूल्यों को अपने जीवन में काफी महत्व दिया।


महात्मा गांधी का बचपन और शिक्षा

गांधीजी का बचपन मुख्य रूप से राजकोट में बीता। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में प्राप्त की और बाद में हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की।

1887 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने भावनगर के सामलदास कॉलेज में प्रवेश लिया, लेकिन पढ़ाई जारी नहीं रख सके।

इसके बाद कानून की पढ़ाई करने के लिए वे 4 सितंबर 1888 को इंग्लैंड रवाना हुए। उन्होंने लंदन में कानून की शिक्षा प्राप्त की और बैरिस्टर बने।


महात्मा गांधी का विवाह किससे हुआ था?

महात्मा गांधी का विवाह कस्तूरबा गांधी से हुआ था। दोनों का विवाह 1883 में हुआ था। उस समय गांधीजी और कस्तूरबा दोनों काफी कम उम्र के थे। कस्तूरबा ने आगे चलकर गांधीजी के सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कस्तूरबा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय भाग लिया और कई अवसरों पर जेल गईं। 1944 में आगा खान पैलेस में उनका निधन हुआ।


दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी का संघर्ष

कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद गांधीजी भारत लौटे, लेकिन 1893 में वे एक कानूनी काम के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए।

दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव और अन्याय ने गांधीजी के जीवन की दिशा बदल दी।

एक प्रसिद्ध घटना में उन्हें वैध प्रथम श्रेणी टिकट होने के बावजूद ट्रेन के प्रथम श्रेणी डिब्बे से बाहर निकाल दिया गया। यह घटना उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।

इसके बाद उन्होंने भारतीय समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू किया और सत्याग्रह तथा अहिंसक प्रतिरोध के सिद्धांतों को विकसित किया।

दक्षिण अफ्रीका में उनका संघर्ष आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की रणनीति की नींव बना।


गांधीजी भारत कब वापस आए?

महात्मा गांधी लगभग 21 वर्षों तक दक्षिण अफ्रीका में रहे। वे 1915 में भारत वापस लौटे।

भारत आने के बाद उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया और आम जनता, किसानों, मजदूरों तथा गरीबों की समस्याओं को समझने का प्रयास किया। 1915 में उन्होंने कोचरब में सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की, जिसे बाद में साबरमती नदी के किनारे स्थानांतरित किया गया।


भारत की आजादी में महात्मा गांधी का योगदान

भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में महात्मा गांधी का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को बड़े पैमाने पर आम जनता से जोड़ा।

उनके नेतृत्व में किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलनों में भाग लिया।

गांधीजी ने हथियारबंद संघर्ष के बजाय सत्याग्रह, अहिंसा, असहयोग और सविनय अवज्ञा को संघर्ष का माध्यम बनाया।

उनके प्रमुख आंदोलनों में शामिल हैं:

  • चंपारण सत्याग्रह
  • खेड़ा सत्याग्रह
  • अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन
  • असहयोग आंदोलन
  • नमक सत्याग्रह
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन
  • भारत छोड़ो आंदोलन
  • अस्पृश्यता विरोधी अभियान
  • स्वदेशी और खादी आंदोलन

चंपारण सत्याग्रह 1917

1917 का चंपारण सत्याग्रह गांधीजी के भारत में शुरुआती बड़े आंदोलनों में से एक था।

बिहार के चंपारण में किसानों को नील की खेती से संबंधित शोषण और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था। गांधीजी ने किसानों की समस्याओं को समझा और उनके पक्ष में आंदोलन किया।

चंपारण सत्याग्रह की सफलता ने गांधीजी को भारतीय जनता के बीच एक प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


खेड़ा सत्याग्रह 1918

1918 में गुजरात के खेड़ा क्षेत्र में किसानों को खराब फसल और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। किसान लगान में राहत की मांग कर रहे थे।

गांधीजी ने किसानों के साथ मिलकर कर न देने के अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया। इस आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल सहित कई कार्यकर्ताओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन

1918 में गांधीजी ने अहमदाबाद के कपड़ा मिल मजदूरों के मुद्दे पर भी संघर्ष किया। मजदूरों और मिल मालिकों के बीच विवाद को सुलझाने के लिए गांधीजी ने सत्याग्रह और उपवास का सहारा लिया।

अंततः इस विवाद को बातचीत और मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाया गया।


असहयोग आंदोलन

1920 में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को व्यापक रूप दिया।

इस आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश शासन के साथ भारतीयों के सहयोग को समाप्त करना था। लोगों से विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने, सरकारी संस्थाओं से दूरी बनाने और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की अपील की गई।

गांधीजी ने खादी और चरखे को आत्मनिर्भरता तथा स्वदेशी का प्रतीक बनाया।

हालांकि चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने 1922 में आंदोलन को रोक दिया। उनके लिए अहिंसा केवल राजनीतिक रणनीति नहीं बल्कि जीवन का मूल सिद्धांत थी।


दांडी मार्च और नमक सत्याग्रह

महात्मा गांधी के सबसे प्रसिद्ध आंदोलनों में दांडी मार्च का विशेष स्थान है।

12 मार्च 1930 को गांधीजी ने साबरमती आश्रम से दांडी के लिए मार्च शुरू किया। उनके साथ शुरुआत में 78 स्वयंसेवक थे। यह यात्रा लगभग 390 किलोमीटर की थी और 24 दिनों में पूरी हुई।

दांडी पहुंचकर गांधीजी ने नमक कानून का उल्लंघन किया। नमक जैसे रोजमर्रा की वस्तु को स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बनाकर उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन खड़ा किया।

दांडी मार्च ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी ध्यान आकर्षित कराया।


सविनय अवज्ञा आंदोलन

नमक सत्याग्रह व्यापक सविनय अवज्ञा आंदोलन का हिस्सा बना।

इस आंदोलन में लोगों ने अन्यायपूर्ण औपनिवेशिक कानूनों का अहिंसक तरीके से विरोध किया। गांधीजी का विश्वास था कि अन्यायपूर्ण व्यवस्था को जनता के शांतिपूर्ण असहयोग से चुनौती दी जा सकती है।


भारत छोड़ो आंदोलन 1942

महात्मा गांधी के स्वतंत्रता संघर्ष का एक सबसे महत्वपूर्ण चरण था भारत छोड़ो आंदोलन।

अगस्त 1942 में कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया। इसका प्रमुख संदेश था:

“करो या मरो”

इस आंदोलन के बाद ब्रिटिश सरकार ने गांधीजी सहित कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। भारत छोड़ो आंदोलन ने स्वतंत्रता की मांग को निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया।


गांधीजी ने स्वदेशी और खादी को क्यों बढ़ावा दिया?

गांधीजी का मानना था कि भारत को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारतीयों को अपने देश में बनी वस्तुओं को अपनाना चाहिए।

उन्होंने:

  • विदेशी कपड़ों के बहिष्कार का समर्थन किया।
  • खादी पहनने को प्रोत्साहित किया।
  • चरखे को आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनाया।
  • ग्रामीण रोजगार पर जोर दिया।
  • स्थानीय उत्पादन और स्वावलंबन की बात की।

गांधीजी के लिए स्वदेशी केवल आर्थिक विचार नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।


अस्पृश्यता के खिलाफ गांधीजी का अभियान

गांधीजी ने समाज में व्याप्त अस्पृश्यता के खिलाफ भी व्यापक अभियान चलाया।

उन्होंने दलितों के सम्मान और सामाजिक समानता की वकालत की तथा अस्पृश्यता को सामाजिक बुराई माना।

1933 में उन्होंने ‘हरिजन’ नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन शुरू किया और अस्पृश्यता के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाया।


हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए गांधीजी के प्रयास

गांधीजी धार्मिक सद्भाव और साम्प्रदायिक एकता को बहुत महत्वपूर्ण मानते थे।

भारत के विभाजन और साम्प्रदायिक हिंसा के दौर में उन्होंने लोगों के बीच शांति स्थापित करने के लिए कई स्थानों की यात्रा की।

1947 में जब देश स्वतंत्र हुआ, तब भी गांधीजी सत्ता और उत्सव से दूर रहकर साम्प्रदायिक हिंसा को रोकने तथा शांति स्थापित करने के प्रयास में लगे रहे।


गांधीजी के प्रमुख सिद्धांत

महात्मा गांधी के जीवन के कुछ प्रमुख सिद्धांत थे:

1. सत्य

गांधीजी के लिए सत्य जीवन का आधार था।

2. अहिंसा

वे मानते थे कि अन्याय का विरोध बिना हिंसा के भी किया जा सकता है।

3. सत्याग्रह

सत्य और अहिंसा के आधार पर अन्याय के खिलाफ दृढ़ता से खड़े होना उनके सत्याग्रह का मूल विचार था।

4. स्वराज

गांधीजी के लिए स्वराज का अर्थ केवल अंग्रेजों से राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं बल्कि व्यक्ति और समाज का आत्मनिर्भर होना भी था।

5. स्वदेशी

देश में बनी वस्तुओं के उपयोग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर उन्होंने जोर दिया।


महात्मा गांधी की प्रमुख उपलब्धियां

महात्मा गांधी की उपलब्धियों को केवल राजनीतिक जीत के रूप में नहीं देखा जा सकता। उनके प्रमुख योगदानों में शामिल हैं:

  • भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को जन-आंदोलन का स्वरूप देना।
  • सत्याग्रह और अहिंसा को प्रभावशाली राजनीतिक साधन बनाना।
  • चंपारण के किसानों की समस्याओं के लिए संघर्ष करना।
  • खेड़ा के किसानों का समर्थन करना।
  • मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष करना।
  • असहयोग आंदोलन का नेतृत्व करना।
  • दांडी मार्च के माध्यम से नमक कानून का विरोध करना।
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन को नेतृत्व देना।
  • भारत छोड़ो आंदोलन में निर्णायक भूमिका निभाना।
  • स्वदेशी और खादी को बढ़ावा देना।
  • अस्पृश्यता के खिलाफ अभियान चलाना।
  • साम्प्रदायिक सद्भाव और शांति के लिए लगातार प्रयास करना।
  • अहिंसा के विचार को भारत की सीमाओं से बाहर विश्वभर में प्रभावशाली बनाना।

महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ क्यों कहा जाता है?

भारत में महात्मा गांधी को सम्मानपूर्वक ‘राष्ट्रपिता’ और ‘बापू’ कहा जाता है।

हालांकि “राष्ट्रपिता” एक सम्मानजनक संबोधन के रूप में व्यापक रूप से प्रचलित है, गांधीजी का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान भारतीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने स्वतंत्रता संघर्ष को आम लोगों से जोड़ने और अहिंसक जनआंदोलन को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई।


महात्मा गांधी का निधन कब हुआ?

महात्मा गांधी का निधन 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला भवन में प्रार्थना सभा के लिए जाते समय गोली लगने से हुआ।

उनकी हत्या नाथूराम गोडसे ने की थी। गांधीजी की मृत्यु के बाद देशभर में शोक की लहर फैल गई।

आज 30 जनवरी को भारत में शहीद दिवस के रूप में भी स्मरण किया जाता है।


गांधी जयंती क्यों मनाई जाती है?

गांधी जयंती केवल महात्मा गांधी की जन्मतिथि को याद करने का दिन नहीं है। यह उनके विचारों और आदर्शों को याद करने का अवसर भी है।

इस दिन विशेष रूप से:

  • सत्य और अहिंसा के संदेश को याद किया जाता है।
  • स्वच्छता अभियान चलाए जाते हैं।
  • गांधीजी को श्रद्धांजलि दी जाती है।
  • प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं।
  • सामाजिक सेवा कार्यक्रम किए जाते हैं।
  • विद्यार्थियों के लिए भाषण, निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताएं होती हैं।
  • गांधीजी के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

भारत सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों में भी गांधीजी की जयंती को स्वच्छता और सेवा से जोड़ा गया है।


गांधी जयंती का महत्व

गांधी जयंती आज के समय में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया में हिंसा, संघर्ष और सामाजिक तनाव जैसी समस्याएं मौजूद हैं।

गांधीजी का संदेश हमें सिखाता है कि सत्य, अहिंसा, संवाद और शांतिपूर्ण संघर्ष के माध्यम से भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।

उनका जीवन यह संदेश देता है कि किसी व्यक्ति की ताकत केवल हथियारों या सत्ता में नहीं बल्कि उसके विचारों, चरित्र और दृढ़ संकल्प में भी हो सकती है।


महात्मा गांधी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

विषयजानकारी
पूरा नाममोहनदास करमचंद गांधी
लोकप्रिय नाममहात्मा गांधी, बापू
जन्म2 अक्टूबर 1869
जन्म स्थानपोरबंदर, गुजरात
पिताकरमचंद गांधी
मातापुतलीबाई गांधी
पत्नीकस्तूरबा गांधी
शिक्षाकानून की पढ़ाई, लंदन
दक्षिण अफ्रीका1893 में गए
भारत वापसी1915
चंपारण सत्याग्रह1917
खेड़ा सत्याग्रह1918
असहयोग आंदोलन1920
दांडी मार्च1930
भारत छोड़ो आंदोलन1942
निधन30 जनवरी 1948
प्रमुख सिद्धांतसत्य और अहिंसा

इन जीवन-घटनाओं का सरकारी गांधी स्मृति स्रोत में विस्तृत कालक्रम भी उपलब्ध है।


गांधी जयंती 2026: FAQs

1. गांधी जयंती कब मनाई जाती है?

गांधी जयंती हर साल 2 अक्टूबर को मनाई जाती है।

2. गांधी जयंती 2026 में कौन से दिन है?

2 अक्टूबर 2026 को शुक्रवार के दिन गांधी जयंती मनाई जाएगी।

3. महात्मा गांधी का पूरा नाम क्या था?

महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।

4. महात्मा गांधी का जन्म कब हुआ था?

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था।

5. महात्मा गांधी का जन्म कहां हुआ था?

उनका जन्म पोरबंदर, गुजरात में हुआ था।

6. महात्मा गांधी के पिता का नाम क्या था?

उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था।

7. महात्मा गांधी की माता का नाम क्या था?

उनकी माता का नाम पुतलीबाई गांधी था।

8. महात्मा गांधी की पत्नी कौन थीं?

महात्मा गांधी की पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी था।

9. गांधीजी ने कानून की पढ़ाई कहां की थी?

गांधीजी ने लंदन में कानून की पढ़ाई की थी और बैरिस्टर बने।

10. गांधीजी दक्षिण अफ्रीका क्यों गए थे?

वे 1893 में एक कानूनी मामले के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए थे। वहां भारतीयों के साथ होने वाले भेदभाव का सामना करने के बाद उन्होंने उनके अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू किया।

11. गांधीजी भारत कब लौटे थे?

महात्मा गांधी 1915 में भारत लौटे थे।

12. गांधीजी का पहला बड़ा सत्याग्रह भारत में कौन सा था?

चंपारण सत्याग्रह, 1917 गांधीजी के भारत में शुरुआती प्रमुख सत्याग्रहों में से एक था।

13. दांडी मार्च कब शुरू हुआ था?

दांडी मार्च 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुआ था।

14. भारत छोड़ो आंदोलन कब शुरू हुआ था?

भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में शुरू हुआ था।

15. गांधीजी का सबसे प्रमुख सिद्धांत क्या था?

गांधीजी के प्रमुख सिद्धांतों में सत्य और अहिंसा सबसे महत्वपूर्ण थे।

16. गांधीजी का निधन कब हुआ?

महात्मा गांधी का निधन 30 जनवरी 1948 को हुआ था।

17. गांधी जयंती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किस दिवस के रूप में मनाया जाता है?

2 अक्टूबर को दुनिया में International Day of Non-Violence यानी अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।


निष्कर्ष

2 अक्टूबर गांधी जयंती महात्मा गांधी के जीवन, संघर्ष और विचारों को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर है। गांधीजी ने सत्य और अहिंसा को अपना हथियार बनाकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ ऐसा जनआंदोलन खड़ा किया जिसमें देश के आम नागरिक भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

चंपारण से लेकर दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन तक उनका राजनीतिक जीवन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के महत्वपूर्ण अध्यायों से जुड़ा रहा। साथ ही उन्होंने स्वदेशी, खादी, सामाजिक समानता, अस्पृश्यता विरोध और साम्प्रदायिक सद्भाव जैसे मुद्दों पर भी काम किया।

गांधीजी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि सत्य, अहिंसा, आत्म-अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े से बड़े अन्याय का सामना किया जा सकता है। यही कारण है कि गांधीजी की विरासत आज भी भारत और दुनिया में याद की जाती है।

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