Maa Karma Jhulave Palna Rahu Ke Laal Ko Lyrics
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माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को – गुरु रविदास जी जन्म लोकगीत | हिंदी Lyrics, English Transliteration, Meaning & FAQ

Maa Karma Jhulave Palna Rahu Ke Laal Ko Lyrics : “माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को” गुरु रविदास जी के जन्म और बाल स्वरूप की स्मृति से जुड़ा एक भावपूर्ण पारंपरिक लोकगीत है। लोकभक्ति की शैली में रचे इस गीत में माता कर्मा द्वारा बालक को पालने में झुलाने, उसके जन्म के अद्भुत प्रसंग और वात्सल्य भाव का सुंदर वर्णन मिलता है।

गीत की सरल लोकभाषा इसे विशेष रूप से भक्तिमय और हृदयस्पर्शी बनाती है। इसमें बालक के प्रति माँ का स्नेह, उसकी दिव्यता और उसके जन्म से जुड़े लोकविश्वासों की झलक दिखाई देती है।


माँ कर्मा झुलावे पालना राहू के लाल को – हिंदी Lyrics

Maa Karma Jhulave Palna Rahu Ke Laal Ko Lyrics :

मुखड़ा

माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को,
माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को।
राहू के लाल को, इस दीन दयाल को,
राहू के लाल को, इस दीन दयाल को॥

माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को,
माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को॥

अंतरा 1

आधी रात में लल्ला जनम्या, हुई विरह की पीर,
आधी रात में लल्ला जनम्या, हुई विरह की पीर।

किस दुष्ट की नजर लगी है,
किस दुष्ट की नजर लगी है,
सोवे ना मेरा वीर॥

माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को,
माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को॥

अंतरा 2

हरी नखस में घाल्या पालना, तले बिछाया चीर,
हरी नखस में घाल्या पालना, तले बिछाया चीर।

आते-जाते झोंट्या देवे,
आते-जाते झोंट्या देवे,
तब भी ना सोवे मेरा वीर॥

माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को,
माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को॥

अंतरा 3

सुरा गाय का दूध मंगाकर, रस भर रांधी खीर,
सुरा गाय का दूध मंगाकर, रस भर रांधी खीर।

खीर ना खावे, दूध ना पीवे,
खीर ना खावे, दूध ना पीवे,
कैसे सोवे मेरा वीर॥

माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को,
माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को॥

अंतरा 4

तीन लोक और चौदह भवन में, कहीं ना पाया मेरा वीर,
तीन लोक और चौदह भवन में, कहीं ना पाया मेरा वीर।

कहां झुलाऊँ लल्ला को,
कहां झुलाऊँ लल्ला को,
निर्मल बने शरीर॥

माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को,
राहू के लाल को, इस दीन दयाल को।
राहू के लाल को, इस दीन दयाल को॥

माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को,
माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को॥


माँ कर्मा झुलावे पालना – English Transliteration

Maa Karma Jhulave Palna Rahu Ke Laal Ko Lyrics :

Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko,
Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko.
Rahu Ke Laal Ko, Is Deen Dayal Ko,
Rahu Ke Laal Ko, Is Deen Dayal Ko.

Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko,
Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko.

Antara 1

Aadhi Raat Mein Lalla Janmya, Hui Virah Ki Peer,
Aadhi Raat Mein Lalla Janmya, Hui Virah Ki Peer.

Kis Dusht Ki Nazar Lagi Hai,
Kis Dusht Ki Nazar Lagi Hai,
Sove Na Mera Veer.

Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko,
Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko.

Antara 2

Hari Naksh Mein Ghalya Palna, Tale Bichhaya Cheer,
Hari Naksh Mein Ghalya Palna, Tale Bichhaya Cheer.

Aate-Jaate Jhontya Deve,
Aate-Jaate Jhontya Deve,
Tab Bhi Na Sove Mera Veer.

Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko,
Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko.

Antara 3

Sura Gaay Ka Doodh Mangakar, Ras Bhar Randhi Kheer,
Sura Gaay Ka Doodh Mangakar, Ras Bhar Randhi Kheer.

Kheer Na Khaave, Doodh Na Peeve,
Kheer Na Khaave, Doodh Na Peeve,
Kaise Sove Mera Veer.

Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko,
Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko.

Antara 4

Teen Lok Aur Chaudah Bhavan Mein, Kahin Na Paaya Mera Veer,
Teen Lok Aur Chaudah Bhavan Mein, Kahin Na Paaya Mera Veer.

Kahaan Jhulaaun Lalla Ko,
Kahaan Jhulaaun Lalla Ko,
Nirmal Bane Shareer.

Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko,
Rahu Ke Laal Ko, Is Deen Dayal Ko.
Rahu Ke Laal Ko, Is Deen Dayal Ko.

Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko,
Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko.


भजन का भावार्थ

Maa Karma Jhulave Palna Rahu Ke Laal Ko Lyrics : इस लोकगीत में माता कर्मा और बालक के वात्सल्य भाव को केंद्र में रखा गया है। माँ अपने लाल को पालने में झुलाती है और उसे सुलाने का प्रयास करती है, लेकिन बालक सोता नहीं।

गीत में आधी रात में बालक के जन्म, उसकी बेचैनी, उसे शांत करने के लिए पालना झुलाने और दूध-खीर खिलाने जैसे भावों का वर्णन किया गया है। इन पंक्तियों में एक माँ के स्वाभाविक वात्सल्य के साथ-साथ बालक के दिव्य स्वरूप की लोकमान्यता भी दिखाई देती है।

Maa Karma Jhulave Palna Rahu Ke Laal Ko Lyrics : “तीन लोक और चौदह भवन में कहीं न पाया मेरा वीर” जैसी पंक्तियां बालक की असाधारण महिमा को दर्शाने वाली लोकभक्ति की अभिव्यक्ति हैं।


English Meaning

Maa Karma Jhulave Palna Rahu Ke Laal Ko Lyrics : “Maa Karma Jhulave Palna, Rahu Ke Laal Ko” is a traditional devotional folk song describing the loving bond between a mother and her divine child.

The song portrays Maa Karma lovingly rocking the cradle of her beloved child. She tries different ways to comfort him—rocking the cradle, offering milk and kheer, and caring for him with affection—yet the child remains awake.

Maa Karma Jhulave Palna Rahu Ke Laal Ko Lyrics : The lyrics beautifully combine motherly love, devotion and the sense of divine presence. The references to the three worlds and fourteen realms further emphasize the extraordinary and revered nature of the child in the traditional devotional narrative.

The overall feeling of the song is one of love, reverence, innocence and spiritual devotion.


गुरु रविदास जी के जन्म से जुड़े लोकगीत के रूप में महत्व

Maa Karma Jhulave Palna Rahu Ke Laal Ko Lyrics : गुरु रविदास जी भारतीय संत परंपरा के महान संतों में माने जाते हैं। उनकी शिक्षाओं में समानता, भक्ति, मानवता और सामाजिक सद्भाव का विशेष महत्व रहा है।

उनके जन्म से जुड़े लोकगीतों और भजनों में भक्त समुदाय की श्रद्धा, लोकस्मृति और धार्मिक भावनाएं अभिव्यक्त होती हैं। “माँ कर्मा झुलावे पालना” भी इसी लोकभक्ति परंपरा का भावपूर्ण उदाहरण है।

नोट: इस तरह के पारंपरिक लोकगीतों की पंक्तियों और स्थानीय बोलियों में अलग-अलग क्षेत्रों या गायन परंपराओं के अनुसार शब्दों में थोड़ा अंतर मिल सकता है।


यह लोकगीत कब गाया जाता है?

Maa Karma Jhulave Palna Rahu Ke Laal Ko Lyrics : यह गीत विशेष रूप से गुरु रविदास जी से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में गाया जा सकता है, जैसे—

  • गुरु रविदास जयंती
  • गुरु रविदास जन्मोत्सव
  • रविदास मंदिरों के धार्मिक कार्यक्रम
  • भजन एवं कीर्तन
  • सत्संग
  • धार्मिक जागरण
  • गुरु रविदास जी की शोभायात्रा
  • सामुदायिक भक्ति कार्यक्रम

गीत की प्रमुख विशेषताएं
🙏 वात्सल्य भाव

माँ द्वारा बालक को पालने में झुलाने का भाव गीत को बेहद भावुक बनाता है।

🎵 लोकभाषा की मिठास

सरल और पारंपरिक भाषा इसे आम भक्तों के लिए सहज बनाती है।

🌸 भक्ति और श्रद्धा

गीत में बालक के प्रति प्रेम के साथ उसकी दिव्यता के प्रति श्रद्धा भी दिखाई देती है।

🪔 लोक परंपरा की झलक

गीत में पारंपरिक जन्मोत्सव और मातृत्व से जुड़े लोकभाव दिखाई देते हैं।


गुरु रविदास जी की शिक्षाओं से जुड़ा संदेश

Maa Karma Jhulave Palna Rahu Ke Laal Ko Lyrics : गुरु रविदास जी की भक्ति परंपरा का मूल संदेश बाहरी भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता, प्रेम, समानता और ईश्वर-भक्ति की ओर बढ़ना है।

उनकी वाणी में मनुष्य के आंतरिक शुद्धिकरण और अच्छे कर्मों को विशेष महत्व मिलता है। इसलिए उनके जन्म से जुड़े भजन और लोकगीत केवल धार्मिक उत्सव का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि भक्तों को प्रेम, भक्ति और सद्भाव की भावना से जोड़ने का माध्यम भी हैं।


FAQs – माँ कर्मा झुलावे पालना
1. “माँ कर्मा झुलावे पालना” किससे संबंधित लोकगीत है?

यह गुरु रविदास जी के जन्म और बाल स्वरूप से जुड़ा एक पारंपरिक लोकगीत माना जाता है।

2. इस गीत में माँ कर्मा किसे पालने में झुलाती हैं?

लोकगीत में माँ कर्मा अपने प्रिय बालक को पालने में झुलाती हुई दिखाई गई हैं।

3. इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

इसका मुख्य भाव मातृ वात्सल्य, प्रेम, श्रद्धा और भक्ति है।

4. “राहू के लाल” का क्या भाव है?

“राहू के लाल” लोकगीत में प्रयुक्त पारंपरिक संबोधन है। अलग-अलग लोकपरंपराओं में इसके उच्चारण और शब्दों में भिन्नता मिल सकती है।

5. क्या यह गीत गुरु रविदास जयंती पर गाया जा सकता है?

हाँ, गुरु रविदास जयंती और जन्मोत्सव से जुड़े भजन-कीर्तन कार्यक्रमों में इसे श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

6. क्या इस गीत के बोल अलग-अलग जगहों पर अलग मिल सकते हैं?

हाँ। पारंपरिक लोकगीत मौखिक परंपरा से आगे बढ़ते हैं, इसलिए क्षेत्र और गायन शैली के अनुसार कुछ शब्दों या पंक्तियों में अंतर संभव है।

7. इस गीत में तीन लोक और चौदह भवन का उल्लेख क्यों है?

यह लोकभक्ति की शैली में बालक की असाधारण महिमा और दिव्य स्वरूप को व्यक्त करने वाली पंक्ति है।

8. क्या इस गीत को भजन कार्यक्रम में गाया जा सकता है?

बिल्कुल। इसकी सरल धुन और भावपूर्ण शब्द इसे भजन, कीर्तन और जन्मोत्सव कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त बनाते हैं।


निष्कर्ष

Maa Karma Jhulave Palna Rahu Ke Laal Ko Lyrics : “माँ कर्मा झुलावे पालना, राहू के लाल को” एक भावपूर्ण पारंपरिक लोकगीत है, जिसमें माँ के वात्सल्य और बालक के प्रति श्रद्धा का सुंदर संगम देखने को मिलता है। पालना झुलाने से लेकर दूध और खीर खिलाने तक के प्रसंग गीत में मातृ प्रेम को जीवंत बनाते हैं, जबकि तीन लोक और चौदह भवन का उल्लेख बालक की दिव्य महिमा को लोकभाषा में प्रस्तुत करता है।

गुरु रविदास जी की जन्म परंपरा से जुड़े ऐसे लोकगीत भक्तों को उनकी स्मृति, भक्ति और संत परंपरा से जोड़ने का काम करते हैं। गुरु रविदास जी की जयंती, जन्मोत्सव, भजन-कीर्तन और सत्संग के अवसर पर यह गीत श्रद्धा और भाव के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है।

जय गुरु रविदास जी महाराज। 🙏

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